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Thursday, June 25, 2020

न्यूट्रॉन की खोज किसने की थी? - Who discover Neutron ?

न्यूट्रॉन की खोज किसने की थी?

एक परमाणु तीन प्रकार के मूल कणों के मिलने से बनता है, इन्हें इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन कहते हैं। न्यूट्रॉन और प्रोटॉन मिलकर परमाणु नाभिक  (Nucleus ) बनाते हैं। जबकि इलेक्ट्रान नाभिक के चारो और विभिन्न कक्षाओं में भ्रमण करते रहते हैं । न्यूट्रॉन पदार्थ का एक उप आणविक (Sub -Atomic ) कण है। न्यूट्रॉन पर कोई विद्युत आवेश नहीं होता। 

न्यूट्रॉन की खोज किसने की - Neutron invention

न्यूट्रॉन का आविष्कार - Discovery of neutron

न्यूट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटॉन से अधिक होता है। क्या आप जानते हैं  कि न्यूट्रॉन का आविष्कार किसने किया। ?  न्यूट्रॉन का आविष्कार सर जेम्स चैडविक नामक ब्रिटिश भौतिक शास्त्री ने किया था । सन 1900 में वैज्ञानिकों को इस बात का पता चल गया था कि परमाणु में इलेक्ट्रॉन और फोटो नामक विद्युत आवेशित कण होते हैं। इलेक्ट्रॉनों पर ऋणात्मक (Negative)और प्रोटॉन पर धनात्मक (Positive) आवेश होता है। 

वैज्ञानिकों को संदेह था की परमाणु में उदासीन कण भी हो सकते हैं। सन 1932 में चैडविक ने यह प्रदर्शित कर दिखाया कि बेरिलियम (Beryllium) नामक तत्व पर अल्फा किरणों की बौछार करने से जो विकिरण (Radiation) निकलते हैं वे वास्तव में उदासीन कण ही होते हैं। इन कणों का नाम न्यूट्रॉन रखा ।


चैडविक ने इन कणो के दूसरे गुणों का भी अध्ययन किया। उन्होंने आण्विक नाभिक से निकलने वाले न्यूट्रॉन को तीव्र न्यूट्रॉन नाम दिया ।  

चैडविक नहीं समस्थानिको (Isotopes) के अस्तित्व की भी विवेचना की। उन्होंने बताया कि जब किसी समान प्रोटॉन की संख्या वाले नाभिकों में न्यूट्रॉन की असमान संख्या होती है तब ऐसे नाभिकों को उस तत्व का समस्थानिक कहते हैं। 

न्यूट्रॉन की संख्या भिन्न होती है । इसका आणविक भार भिन्न होता है।चैडविक को उनके द्वारा किए गए आविष्कारों पर सन 1935 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया। चैडविक ने नाभिक श्रृंखला प्रक्रियाओं पर सराहनीय कार्य किया । उन्होंने वित्तीय विश्वयुद्ध के दौरान विकसित हुए परमाणु बम के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

न्यूट्रॉन के गुणों का अध्ययन करने पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि जब यह कण नाभिक के बाहर होता है, तब अस्थाई होता है। औसतन 12 मिनट में एक न्यूट्रॉन का क्षय हो जाता है। 

समय की लंबाई को न्यूट्रॉन का आधा जीवन कहा जाता है। नाभिक के अंदर न्यूट्रॉन सामान्यता स्थाई होते हैं, लेकिन यदि नाभिक के अंदर इनका क्षय  होने लगता है तब यह पदार्थ रेडियोधर्मी (Radio Active ) हो जाता है। 

न्यूट्रॉन की किरणे खतरनाक होती हैं 

न्यूट्रॉन की किरणें बहुत ही खतरनाक होती है वे आसानी से किसी भी पदार्थ में प्रवेश कर सकती हैं। यही कारण है कि जो वैज्ञानिक संस्थानों में कार्य करते हैं उन्हें अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए सुरक्षा कवच पहनने पड़ते हैं

Saturday, June 20, 2020

क्वार्ट्ज़ क्या है? इसके उपयोग और महत्त्व - What is Quartz ?

क्वार्ट्ज़ क्या है? - What is Quartz ?

क्वार्ट्ज़ (Quartz ) प्रकृति से सबसे अधिक मात्रा में मिलने वाला खनिज पदार्थ है। अधिकतर चट्टाने इसी से बनी होती है। यह शुद्ध कायंतरित और तलहटी चट्टानों का मुख्य हिस्सा है। यह वास्तव में सिलिकॉन और ऑक्सीजन का विशेष योगिक है। 

शुद्ध कोर्स में सिलिका और सिलीकान डाइऑक्साइड होते हैं। क्वार्ट्ज़ देखने में काँच की तरह परभासी होता है और यह बिल्कुल काँच जैसा लगता है और काँच की भांति ही भुरभुरा होता है लेकिन यह सख्त होता है और इसके पिघलने का तापमान भी काँच से बहुत अधिक होता है। 

इसे काँच की तरह पिघलाकर नालियां और अन्य उपयोगी सामान बनाए जाते हैं। इन्हें चौकोर टुकड़ों में ढाला जा सकता है। ऑक्सीजन और हाइड्रोजन की लपटों के द्वारा इसे विभिन्न रूपों में ढाला जा सकता है । क्वार्ट्ज आर्थिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण पदार्थ है। 

क्वार्ट्ज़ क्या है? इसके उपयोग और महत्त्व - What is Quartz ?

क्वार्ट्ज़ के रूप  - Quartz different forms 

इसकी बहुत सी किस्में बहुमूल्य पत्थरों के रूप में आभूषणों में प्रयोग की जाती हैं। एमेथिस्ट, सिटिरिन, नीला क्वार्ट्ज़ और धुए के रंग का क्वार्ट्ज़ आमतौर पर आभूषणों में प्रयोग किया जाता है। 

क्वार्ट्ज़ के उपयोग - Quartz uses 


इन सभी रंगों के क्वार्ट्ज से आभूषण बनाए जाते हैं। बलुआ पत्थर, जिसमे प्रचुर मात्रा में क्वार्ट्ज होता है भवन निर्माण के लिए बहुत ही उपयोगी है। क्वार्ट्ज वाली बालू को काँच और और पोर्सलीन के निर्माण में भी प्रयोग में लाते हैं। 

रेगमार्क और घिसाई में काम आने वाले पत्थरों के निर्माण में भी क्वार्ट्ज का प्रयोग होता है इससे पराबेंगनी प्रकाश के लिए लेंस भी बनाए जाते हैं। क्वार्ट्ज से बानी नलिकाएं तथा दूसरे उपकरण प्रयोगशाला में काम आते हैं। 

क्वार्ट्ज से बने तंतु अत्यंत संवेदी तुलओं में काम आते हैं। क्वार्ट्ज एक पीजोइलेक्ट्रिक इलेक्ट्रिक पदार्थ है। पीजोइलेक्ट्रिक पदार्थ वे पदार्थ होते हैं जिन पर दाब लगाने से विद्युत विभव पैदा हो जाता है और विद्युत विभव लगाने से क्वार्ट्ज में प्रसार और सिकुड़ाव अर्थात कंपन पैदा हो जाती है। 

 इसके गुण के आधार पर क्वार्ट्ज द्वारा विद्युत संदेशों को ध्वनि तरंगों में और ध्वनि को विद्युत कम्पनों में बदला जा सकता है क्वार्ट्ज का पीजोइलेक्ट्रिक गुण टेलीविजन, रडार तथा दीवार की घड़ियों के लिए, यह ओसिलेटर (Oscillator ) बनाने में बहुत ही महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। 

क्वार्ट्ज मणिभों से बनी घड़ियां बहुत ही सही समय प्रदर्शित करती हैं। क्वार्ट्ज के प्रकृति में मिलने वाले मणिभ मुख्य रूप से ब्राजील में मिलते हैं। क्वार्ट्ज को कृत्रिम रूप से भी बनाया जा सकता है

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Friday, June 19, 2020

मौत की घाटी का रहस्य? What is death valley famous for?

मौत की घाटी क्या है ? - What is death valley?

मौत की घाटी (death valley) उत्तरी अमेरिका का एक बहुत ही विचित्र स्थान है यह कैलिफोर्निया के दक्षिण पूर्व में नवादा की सीमा के पास है । इसकी लंबाई 225 किलोमीटर है। अलग-अलग स्थानों पर इसकी चौड़ाई भिन्न-भिन्न है और यह 8 से 24 किलोमीटर के बीच में है।
 
मौत की घाटी को उत्तरी अमेरिका का सबसे गर्म और सूखा स्थान कहा जाता है । इसकी तली सबसे नीची है। तली का सबसे नीचा स्थान समुद्र तल से 86 मीटर नीचे है । इस घाटी का तापमान 49 डिग्री सेंटीग्रेड तक पहुंच जाता है। यहाँ नाम मात्र की वर्षा होती है। 

साल में औसत वर्षा केवल 5 सेंटीमीटर के लगभग होती है। घाटी में पानी का नामो निशान तक नहीं है। अगर है भी तो बहुत ही खारा । सारी घाटी में बालू ही बालू है । 

मौत की घाटी का रहस्य? What is death valley famous for?

मौत की घाटी में मृत्यु ? - Why people die in death valley?


शुरू-शुरू में अमेरिका आने वाले लोगों को या घाटी पार करके ही आना पड़ता था। इसके तापमान और सूखेपन के कारण ही बहुत से लोग घाटी को पार करने में ही मर जाते थे। 

कैलिफ़ोर्निया के आसपास के क्षेत्रों में सोने के भंडारों का पता लगाने के लिए जाने वाले बहुत से लोग भी इस घाटी को पार करते समय मर गए उन्हीं के कारण ही इस घाटी का नाम डेथ वैली यानी मौत की घाटी पड़ा। 

मौत की घाटी क्यों प्रसिद्ध हुई? - Death valley famous for?


1870 में घाटी का अध्ययन किया गया इसमें हजारों जानवर और मनुष्य की हड्डियों के ढांचे मिले इस घाटी को अमेरिका का राष्ट्रीय स्मारक घोषित कर दिया गया। 

इस घाटी के विचित्रता को देखने के लिए हर वर्ष 4-5 हजार लोग यहां आ जाते हैं। यद्यपि यह पूरी घाटी है रेगिस्तान है फिर भी यहां खरगोश, गिलहरी, कंगारू, मुसक आदि जानवर बहुतायत मिलते हैं। 

सन 1890 में किये गए सर्वे में बताया गया था कि इसमें 78 प्रकार के पक्षी हुए हैं। पर्यटकों के लिए आज इसे अति रमणीय स्थान बना दिया गया हैं।

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Thursday, June 18, 2020

खाने के बाद हमें नींद क्यों आने लगती है? Do you sleep after food?

खाने के बाद हमें नींद क्यों आने लगती है? - Why do we sleep after eating?

 Why we sleep after food.? 

यह एक सामान्य अनुभव की बात है कि अधिक भोजन करने के बाद हमें नींद सी आने लगती है और शरीर में शिथिलता आ जाती है। खाना खाने के बाद बहुत ही गहरी नींद आती है। 

भोजन करने के बाद नींद आने का कारण निम्न प्रकार से समझा जा सकता है । सामान्य व्यक्ति के शरीर में लगभग 5 लीटर रक्त होता है। यह रक्त सारे शरीर में संचरण करता रहता है। 

शरीर के विभिन्न भागों में रक्त की मात्रा अलग-अलग होती है जो आवश्यकतानुसार समय-समय पर बदलते रखती है । सामान्य से आने वाले रक्त का 28% यकृत 24% गुर्दा 15% मांसपेशियों को 14% मस्तिष्क को और शेष 19% शरीर के दूसरे भागों को जाता है । 

यह अनुपात कार्यों के अनुसार बदलता रहता है जब हम भोजन करते हैं भोजन के पाचन क्रिया के लिए पेट को रक्त की अधिक आवश्यकता होती है। 

why do we sleep after food?


Reason of sleep after food - खाने के बाद नींद आने का कारण 


भोजन के बाद शरीर के खून का बहुत सारा हिस्सा पेट में प्रवाहित हो जाता है। परिणाम स्वरूप मस्तिष्क में रक्त की मात्रा कुछ समय के लिए कम हो जाती है। 

मस्तिष्क की क्रियाशीलता कम होना है या नींद का कारण है। मस्तिष्क में रक्त की उचित मात्रा पहुंचने में समय लगता है वास्तव में यह एक ऐसी स्थिति है जब शरीर को आराम की आवश्यकता होती है । 

इसलिए भोजन करने के बाद थोड़ी देर आराम करना बहुत जरूरी है

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Wednesday, June 10, 2020

सलादीन (सलाहुद्दीन ) कौन था? Who was Saladin? [Full Info]

सलादीन (सलाहुद्दीन ) कौन था । Who was Saladin?

तीसरे धर्मयुद्ध (Crusade) के समय सलादीन अर्थात सलाहुद्दीन सबसे महान मुस्लिम सेनापति था वह सीरिया और मिस्र का सुल्तान था। 

सलाहुद्दीन सन 1138 में पैदा हुआ था । वह दमिशक के गवर्नर अय्यूब का पुत्र था । उसका पूरा अरबी नाम सलाह- अल-दीन युसूफ बिन अय्यूब था । मिस्र (Egypt ) को ईसाईयों से बचाने के लिए कई वर्ष के अभियान के बाद वह 1174 में वहां का सुल्तान बना।

Who was Saladeen सलादीन (सलाहुद्दीन ) कौन था



सलाहुद्दीन एक धार्मिक मुस्लिम था। वह फिलिस्तीन को ईसाइयों से मुक्त कराने का निश्चय कर चुका था। ईसाइयों ने प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद वहां अपना शासन स्थापित कर लिया था। 

1187  मैं उसने फिलिस्तीन से अपना अभियान आरंभ किया और जेरुसलम अपना अधिकार कर लिया। जब सलाउद्दीन की विजय का समाचार पश्चिम यूरोप पहुंचा तब ईसाइयों ने तीसरे धर्म युद्ध (Crusade ) की घोषणा कर दी। 

इस युद्ध का नेतृत्व रिचर्ड प्रथम  (the lion heart )और फ्रांस के फिलिप द्वितीय ने किया। 3 वर्ष तक चली लड़ाई के बाद रिचर्ड और सलाउद्दीन के बीच समझौता हो गया ।. 

इसके बाद जल्द ही सलाहुद्दीन की मृत्यु हो गई । वह अपनी सैनिक क्षमता एवं वीरता के लिए संसार में प्रसिद्ध है।

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Monday, May 25, 2020

चंद्रमा के सागर क्या है - What is moon sea, lunar sea?

चंद्रमा के सागर क्या है? What is the moon sea or the Lunar sea?

Hello friends,
what is moon sea, is there mountains on the moon, what kind of nature is there on the moon. All these questions will be solved after reading this article, so here are the full details of the moon sea.

जब हम नंगी आंखों से चंद्रमा को देखते हैं तब हमें उसकी सतह पर कुछ काले धब्बे दिखाई देते हैं। प्राचीन काल के लोगों का विचार था चंद्रमा की सतह पर स्थित यह काले धब्बे पानी से भरे सागर है जैसा कि हमारी पृथ्वी के सागर हैं। गैलीलियो ने चंद्रमा के इन काले धब्बों को 1609 मैं अपनी बनाई हुई दूरदर्शी से देखा । 

चंद्रमा के सागर क्या है? What is the moon sea or the Lunar sea?


उन्हें यह काले धब्बे सपाट सागर के रूप में दिखाई दिए इसीलिए उन्हें चंद्रमा के सागरों का नाम दे दिया गया वास्तव में यह सपाट मैदान है जहां पानी का निशान भी नहीं है । लेकिन पुरानी धारणा के अनुसार हम इन्हें आज की सागर कहते हैं खगोलविद इन सागरों को मेयर इम्ब्रायम कहते हैं चमकीले क्षेत्र वास्तव में पहाड़ हैं। इन पहाड़ों पर सूर्य की किरणें पड़ती है । 


चन्द्रमा के कुछ पहाड़ तो लगभग 1000 मीटर तक पहुंचे हैं। आश्चर्य की बात यह है कि गहरे विशाल मैदान चंद्रमा की पृथ्वी की ओर वाली सतह पर ही हैं । दूसरी ओर की सतह पर इनकी संख्या बहुत कम है । दूसरी सतह लगभग पर्वतमालाओं से ही ढकी है । चंद्रमा के इन सागरों को दो वर्गों में बांटा जा सकता है । पहले वर्ग में वह सागर आते हैं जो वृत्ताकार और दूसरे में वो जो अनियमित आकार के हैं । 

वृताकार सागर सामान्यत पर्वतों से घिरे हैं। मेयर इम्ब्रायम और मेयर क्रिसियम चंद्रमा की हमारी ओर की सतह है ऐसे ही सागर हैं । अनियमित सागरों में मेयर ट्रैंकुलेटलिस और ओसनियस प्रोसेरम आते हैं। जिनके किनारों पर विशेष पर्वतमालाएं नहीं हैं । चंद्रमा के सागर तांबे की परतों से ढके हुए हैं। इनका का निर्माण संभवता तीव्र वेग से गिरते हुए विशाल शुद्र ग्रह या उल्का पिंडों के चंद्रमा की सतह पर टकराने के कारण हुआ होगा। 


इनकी टकराव से चंद्रमा की सतह फट गई होगी या ज्वालामुखी फोटो होंगे जिनके कारण विशाल मात्रा में लावा बैठकर सतह पर जम गया होगा । चंद्रमा की सतह की चट्टानों की संरचना बेसाल्ट से मिलती-जुलती है अपोलो के अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा इंसानों की चट्टानों के नमूने एकत्रित किए गए हैं और उनका अध्ययन किया गया है, 

इन अध्ययनों से ऐसा लगता है कि सागरों के बेसिन लगभग 350 करोड़ों वर्ष पहले भरने आरंभ हुआ है। चंद्रमा के पर्वतीय भागों की उत्पत्ति सागरों से पहले हुई थी अधिकतर सागर इन पर्वत मालाओं से घिरे हुए हैं |


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Tuesday, May 19, 2020

Who was Pythagoras , biography, image & formula - पाइथागोरस कौन था?

पाइथागोरस कौन था - Who was Pythagoras his biography and formula 

Hello people, welcome to gyan vigyan. Today we are going to know who was Pythagoras, why he become so famous, what he gave to the world his formula, and all about him. in India, we call it Pythagoras pramey (पाइथागोरस प्रमेय ). 

Pythagoras contribution was remarkable in trigonometry a branch of mathematics. 

पाइथागोरस कौन था - Who was Pythagoras his biography and formula

पाइथागोरस कौन था - (Who was pythagorus?) 

हम सभी प्रारंभिक ज्यामिति एलिमेंट्री ज्योमेट्री के अध्ययन में ‘पाइथागोरियन थ्योरी’ से परिचित हैं। इसमें बताया जाता है कि किसी भी समकोण त्रिभुज की सबसे लंबी भुजा से बनाया जाने वाला समकोण, दूसरी ओर कि दोनों वहां से बनने वाले समकोण की लंबाई के जोड़ के बराबर होता है। 

क्या तुम जानते हो कि वह व्यक्ति कौन था जिसने इस सिद्धांत की खोज की थी जो आज तक ज्यामिति में त्रिकोण के अध्ययन का आधार है ? वह यूनान का दार्शनिक गणितज्ञ और खगोलशास्त्री पाइथागोरस था। पाइथागोरस का जन्म यूनान के समास में ईसा से 500 वर्ष पूर्व हुआ था। 

इटली के आधुनिक मेटोपोंटो नगर के निकट स्थित है वहां से 535 वर्ष पूर्व दक्षिणी इटली चला गया क्योंकि उसके प्रदेश में तानाशाही शासन था और वह उससे बचना चाहता था | लेकिन उसका जिज्ञासु और खोज पर सिद्धांत और दूसरों विचार विनियम करने के लिए प्रेरित करता रहा। इसी के फलस्वरूप उसने कार्टन में (जो अब क्रोटोना के नाम से जाना जाता है ) एक अकादमी की स्थापना की। 

वहां उसने नैतिकता राजनीति और पारस्परिक भाईचारे की जो शिक्षाएं दी उसका लोगों पर बहुत बड़ा असर पड़ा इटली और यूनान के अधिकांश क्षेत्रों में पाइथागोरस के विचारों का अच्छा प्रचार प्रसार हुआ। लेकिन हिसाब पूर्वक चौथी शताब्दी के अंत तक कुछ कारणों से समाज और शासन के विरोध के कारण धीरे-धीरे उसका प्रभाव समाप्त हो गया। 

 उसके द्वारा खोजी गई संख्याओं के क्रियात्मक महत्व से संबंधित योगदान ने गणित तथा ज्यामिति पर एक अमिट छाप छोड़ी वास्तव में उसके विचारों और प्रभाव पश्चिमी दर्शन के अतिरिक्त गणित और ज्यामिति के विकास पर भी पड़ा। यह एक प्रामाणिक तथ्य है कि प्लूटो और अरस्तु के विचारों पर उसके दर्शन का बहुत असर पड़ा ।

विज्ञान जगत में ज्यामिति, बीजगणित, खगोल शास्त्र, उचित व्यवहार आदि से संबंधित उनके सिद्धांतों को कृतज्ञता सहित स्वीकार किया गया उदाहरण के लिए प्रसिद्ध खगोलशास्त्री कॉपरनिकस ने पाठक को अपने सिद्धांत का अग्रदूत माना है कि ग्रह सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं सत्य के सर्वेक्षण की ईसा पूर्व 493 में 3 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई। 
 

Pythagoras Formula

Here is the formula is given by Pythagoras.

                                     Ac2=Ab2+Bc2 (pythagorus theorem equation)

Pythagoras theorem in English


In a right-angled triangle, the square of the hypotenuse is equal to the sum of the squares of base and perpendicular. 

पाइथागोरस प्रमेय हिंदी में 


 किसी भी समकोण त्रिभुज में कर्ण भुजा की घात दो बराबर होगा आधार और लम्ब के घात दो के योग के बराबर होगा।

Pythagoras formula for kids and others and its use

Pythagoras was one of the famous mathematicians, be proposed Pythagoras formula that has much application in our day to day life. School kids use these for solving trigonometric questions and height and distance. Even it is used by many engineers in the work field for the calculation of base, height, and some time for angle. So it is very useful.

Pythagoras image

pythagoras image