Thursday, June 25, 2020
न्यूट्रॉन की खोज किसने की थी? - Who discover Neutron ?
Saturday, June 20, 2020
क्वार्ट्ज़ क्या है? इसके उपयोग और महत्त्व - What is Quartz ?
क्वार्ट्ज़ क्या है? - What is Quartz ?
क्वार्ट्ज़ के रूप - Quartz different forms
क्वार्ट्ज़ के उपयोग - Quartz uses
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Thursday, June 18, 2020
खाने के बाद हमें नींद क्यों आने लगती है? Do you sleep after food?
खाने के बाद हमें नींद क्यों आने लगती है? - Why do we sleep after eating?
Why we sleep after food.?
यह एक सामान्य अनुभव की बात है कि अधिक भोजन करने के बाद हमें नींद सी आने लगती है और शरीर में शिथिलता आ जाती है। खाना खाने के बाद बहुत ही गहरी नींद आती है।Reason of sleep after food - खाने के बाद नींद आने का कारण
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Saturday, May 30, 2020
Why mars planet looks red? - मंगल ग्रह लाल क्यों दिखाई देता है?
मंगल ग्रह लाल क्यों दिखाई देता है ? Why planet mars looks red?
Facts About mars planet
Why mars planet looks red?
पराबेंगनी किरणे क्या हैं ? इसके लाभ और हानि तथा उपयोग ?
Why mars planet is red in color?
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Monday, May 25, 2020
चंद्रमा के सागर क्या है - What is moon sea, lunar sea?
चंद्रमा के सागर क्या है? What is the moon sea or the Lunar sea?
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Thursday, May 21, 2020
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पराबैंगनी किरणें क्या है | लाभ, हानि और बचाव- What is ultraviolet rays, benefits, harm
पराबैंगनी किरणें क्या हैं -What is ultraviolet rays and spectrum
पराबैगनी किरणें क्या होती हैं, परिभाषा, अर्थ - What is ultraviolet rays, definition, meaning?
जब सूर्य के प्रकाश को किसी प्रिज़्म से गुजारा जाए तब यह सात रंगों में विभाजित हो जाती है | यह एक साथ रंगो की पट्टी होती है, इसमें रंग एक निश्चित क्रम में होते हैं। पहला रंग होता है बैंगनी फिर नीला फिर आसमानी हरा, पीला, नारंगी, और अंत में लाल| इसी सात रंग की इस पट्टी को ही हम वर्णक्रम या स्पेक्ट्रम (Spectrum) कहते हैं।पराबैंगनी किरणों की स्पेक्ट्रम में स्थान - Ultraviolet rays in spectrum
इसके अतिरिक्त कुछ विद्युत चुंबकीय तरंगे ऐसी भी हैं जो हमारी आंखों को दिखाई नहीं देती। लाल रंग से कम और बैंगनी रंग से अधिक आवृत्ति की तरंगे हमें दिखाई नहीं देती| लाल रंग से काम आवर्ती की तरंगों को अवरक्त किरणें (Infrared rays) कहते हैं।पराबैगनी किरणों के लाभ और हानि - Advantage and disadvantage of ultraviolet rays
पराबैगनी किरणों से हानि
पराबैंगनी किरणों में बहुत अधिक ऊर्जा निहित होती है। इन किरणों की अधिक मात्रा में शरीर पर पड़ने से त्वचा झुलस जाती है। इतना ही नहीं इन से त्वचा का कैंसर भी हो सकता है। पराबैगनी किरणे आंखों के लिए बहुत ही खतरनाक है खुली आंखों पर इनके सीधे पढ़ने से आंखों में सूजन हो जाती है और मोतियाबिंद हो जाता है या आंखों से पानी आने लग जाता हैपराबैंगनी किरणों से लाभ
सूर्य के प्रकाश में इन किरणों की बहुत अधिक मात्रा होती है लेकिन वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में उपस्थित ओजोन परत द्वारा काफी मात्रा अवशोषित कर ली जाती है | ओजोन परत ओजोन गैस का क्षेत्र है जो एक परत की भांति पृथ्वी के चारों तरफ विद्यमान है ओजोन परत के अवशोषित कर लेने के कारण पराबैंगनी किरणों की बहुत कम मात्रा ही पृथ्वी तक पहुंच पाती है| अगर से सारी किरणे आ जाएं तो धरती पर जीवन संभव नहीं होगा |पराबैगनी किरणों के अनुप्रयोग - Application pf ultraviolet rays
पराबैगनी किरणों के बहुत से लाभ भी हैं इसका ज्यादातर इस्तेमाल त्वचा से जुड़े रोगों में किया जाता है । इसके सीमित इस्तेमाल से मनुष्य को कुछ फायदे होते है और मन मस्तिष्क पर इसका अच्छा प्रभाव पड़ता है जब यह कुछ पदार्थों पर पड़ती है द्वारा प्रकाश उत्पन्न करती हैपराबैंगनी विकिरण क्या है - What is ultraviolet radiation
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Tuesday, May 19, 2020
What is Allergy, how does it happened - ऐलर्जी क्या है, ये कैसे होती है
What is an Allergy? - ऐलर्जी क्या है
ऐलर्जी क्या है, ये कैसे होती है - ज्ञान विज्ञान
- ऐलर्जी क्या है
- ऐलर्जी कैसे होती है
- ऐलर्जी के क्या क्या कारण हो सकते है
- ऐलर्जी होने पर क्या करना चाहिए
प्रोटीन तथा कुछ अन्य पदार्थों के प्रति मानव शरीर के ज्यादा संवेदी होने को एलर्जी कहते हैं। फूलों के परागों के सांप द्वारा अंदर जाने से उत्पन्न परागज ज्वर त्वचा पर चकत्ते, किसी टीके विशेष की प्रतिक्रिया और दमा आदि एलर्जी के कुछ उदाहरण हैं।
हमारे वातावरण में एलर्जी पैदा करने वाले ढेरों पदार्थों के असंख्य कल मिलते हैं। यह पराग या धूल कणों के साथ नाक या आंखो द्वारा शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। पेनिसिलिन जैसे जीवाणु रोधी टीको या खाद्य पदार्थों द्वारा भी शरीर में पहुंच जाते हैं कुछ व्यक्ति मक्खियां मधुमक्खी आदि के काटने या पक्षियों के पंखों में संपर्क में आने पर एलर्जी का शिकार हो जाते हैं।
जिन पदार्थों के कारणों से एलर्जी प्रतिक्रिया होती है उन्हें ऐलेर्जेनअथवा ए औरटीजेन कहा जाता है और उत्तेजना की प्रतिक्रिया के समय शरीर में बनने वाले पदार्थों को एंटीबॉडीज कहते हैं यद्यपि एंटीबॉडीज रोग प्रतिकारक हमारे शरीर की संक्रमण से सुरक्षा करते हैं लेकिन एलर्जी के रूप में यही कारण शरीर में अप्रिय प्रतिक्रिया उत्पन्न करते हैं।
कुछ एलर्जीक प्रतिक्रियाएं विकसित होने में समय लेती है जबकि कुछ एलर्जी इतनी तीव्र गति से असर करती हैं जिससे तुरंत बेहोशी आ जाती है। शरीर का रक्तचाप गिर जाता है सांस लेने में कष्ट होता है और शरीर नीला पड़ जाता है।
ऐसा विश्वास है कि एलर्जी पदार्थों के रोग प्रतिकारक में संयोजन करते हैं और शरीर में हिस्टामिन नामक पदार्थ छोड़ते हैं यह हिस्टामिन रक्त या शरीर के किसी भाग में संपर्क कर चक्कते , खुजली या सूजन पैदा करता है। इसी सिद्धांत के आधार पर एंटी हिस्टामिन औषधि की खोज की गई है जो कई प्रकार से एलर्जी प्रतिक्रियाओं के इलाज में दी जाती है।
सबसे पहली एंटी हिस्टामिन औषधि – फिरलामिन मेलीएट थी अब तो इस प्रकार की अनेक औषधियों का चलन हो चुका है। यह औषधियां अपनी रासायनिक संरचना द्वारा हिस्टामिन के प्रभाव को बढ़ने से रोकती है एंटी हिस्टामिन औषधियां बुखार, दमा , चक्कतों , टीकों (वैक्सीन) और मधुमक्खी के डंक में होने वाले एलर्जी से मुकाबला करती है वैज्ञानिक तीव्रता से होने वाली एलर्जी को रोकने के लिए अब तक कोई प्रभावशाली औषधि नहीं बना पाए हैं।
रासायनिक पदार्थों के संयोजन से आजकल कुछ ऐसी प्रतिकारक संवेदी वस्तुएं भी बनने लगी है, जो एलर्जी उत्पन्न करती हैं। किस प्रकार की एलर्जी से बचने के लिए किसी प्रभावशाली उपचार की आवश्यकता है वातावरण में मौजूद एलर्जी रोग फैलाने वाले पदार्थों पर नियंत्रण के लिए ऐसे पदार्थों से दूर रहने में ही बुद्धिमानी है।
अब प्रश्न यह उठता है कि एक व्यक्ति एलर्जी से पीड़ित हो जाता है जबकि दूसरा नहीं होता जबकि वातावरण में सभी के लिए एलर्जी उत्पन्न करने वाले पदार्थ मौजूद हैं। चिकित्सा विज्ञान इस प्रश्न का अब तक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं ढूंढ पाया है। बहुत से डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के अनुसार यह तथ्य एक महत्वपूर्ण बिंदु है कि व्यक्ति की एलर्जी का नियमन उसके अनुवांशिक गुणों से होता है
आप ये ऐलर्जी पे कुछ वीडियो देख सकते हैं |
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